Saturday, March 19, 2011


उदास शाम के किनारों पर 
यादों की रुनझुन करती 
पायलें खनक रही हैं
थिरकती हुई यादों को 
देख मन को उदासी 
के सायों ने घेर लिया है..

यादों की आँखों में हैरानी के साए हैं
हैरान आँखों से वो पूछती है
में तो यहाँ हूँ,खुश हूँ, थिरक रही हूँ
तुम्हारी आँखों में तलाश फिर ये किसकी है?
उदास सी राहों पर  ये सवालों की कतार क्यूँ लगी हैं

मन  बोला , री नादान…! 
ये तलाश है उन हकीकतों की 
जिनसे तू वजूद में आई
उन आषीशी हाथों की 
जो अपनी नर्म छाँव से सदा मुझे ढके रहे
वो हाथ जो मेरी ऊँगली थाम मुझे 
जीवन की राहों पर चलना सिखाते रहे
जिनकी आँखें अपने जीवन से अधिक मेरे जीवन को आतुर थी
सुरक्षा का वो घेरा आज न जाने कहाँ चला गया
तू तो वजूद में आ गयी मगर वो खो गया

तभी , बस ठीक तभी
आँखों में दो आंसू भर गए हैं
शायद परमात्मा के दूत हैं ....समझाने आये हैं
हकीकतों से यादों के वजूद होते हैं
यादों से हकीकतें नहीं बना करतीं....
मत ढूंढ उन हकीकतों को
जो रेत सी फिसल कर वक़्त की धारा में जा मिली हैं
हाथ थाम ले उन यादों का 
और एहसासों की पगडण्डी पर 
अपना जीवन सफ़र फिर शुरू कर 

और  मैं फिर यादों की थिरकन को देखने लगती हूँ
खामोश  सी ...कुछ स्तब्ध सी...!


7 comments:

  1. यादों की आँखों में हैरानी के साए हैं
    हैरान आँखों से वो पूछती है
    में तो यहाँ हूँ,खुश हूँ, थिरक रही हूँ
    तुम्हारी आँखों में तलाश फिर ये किसकी है?
    उदास सी राहों पर ये सवालों की कतार क्यूँ लगी हैं


    bahut khoobsoorat rachna...

    ankhe kya talaashti hain?? shayad behatar??shayad sarvsreshth?? shayad sukoon?? shayad.....shayad???

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  2. aap charcha manch par shukrvar ko hain .

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  3. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

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  4. http://charchamanch.blogspot.com/
    शुक्रवार : चर्चा मंच - 576

    जानते क्या ? एक रचना है यहाँ पर |
    खोजिये, क्या आपका सम्बन्ध इससे ??

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  5. अनुभूतियों और एहसासों का अप्रतिम विस्फोट है यह रचना .बधाई .

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  6. क्या कहने, बहुत सुंदर
    सुरक्षा का वो घेरा आज न जाने कहाँ चला गया
    तू तो वजूद में आ गयी मगर वो खो गया

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  7. गहरी अनुभूति लिए ... सुन्दर रचना है ..

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