Thursday, November 4, 2010

मंगलकामना





सहस्त्रो दीपों के उज्जवल प्रकाश से आपका मस्तकाभिषेक हो !
समृधि की छत्रछाया में आप एवं आपके  परिवार  का भविष्य गौरान्वित हो !
ऐसी ही अनेकानेक शुभकामनाओं से परिपूर्ण मेरे बधाई कलश को स्वीकार कर मुझे गौरव प्रदान करें ! :)
दीपोत्सव मंगलमय हो !

काहे रे मनवा 
काहे तू अकुलाई 

भ्रम्रौ की प्रीत का कदै पुष्प है पायी  
मधु रस को प्यासों तो 
पान करी उरी जाई
का जानै प्रेम प्यार   मा
कैसन है गहरायी  

काहे रे मनवा 
काहे तू अकुलाई 

बदरा सु का कदै प्रीत लगाल जाई 
आवारा सो है जिसको सुभायी
इहाँ उहाँ भटकत फिरत है 
जहाँ थामे दे मेह बरसाई  
का जानै प्रेम प्यार  मा 
कैसन है गहरायी  

काहे रे मनवा काहे तू अकुलाई 

काहे प्रीत तू जोड़े से 
जो पवन सा बही जाई 
ठौर  सहलाई कदै
कदै परायी ठौर चली जाई
का जानै प्रेम प्यार मा
कैसन है गहरायी  

काहे रे मनवा  
काहे तू अकुलाई 

 तोहरी प्रीत  तो ज्यूँ  वृक्ष कदम्ब को
भटकता ने छांह दे जाई 
नेह पुष्पं को बिछौना कर
क्लांत मन ने विश्राम दे जाई
तोहरे पवन पवित प्रेम सू
वाको मनन सीतल होई जाई

ना रे मनवा 
ना हो विकल तू 
आपण प्रेम को दीप सदा तू 
राखी हों जराई....!