Wednesday, August 29, 2012
















कहेगी, हाँ कहेगी

ये माटी सभी की कहानी कहेगी
कहती आई है 
कहती रहेगी
हाँ, ये माटी सभी की कहानी कहेगी

ये न होगी कोई नानी की कहानी
इसमें न होगी कोई परियों की रानी
यहाँ तो होंगे बस वक्त के राही
उन्ही की बाँचेगी ये माटी कहानी
हाँ कहेगी, ये माटी दीवानी कोई कहानी कहेगी 

होगी कहानी ये वक्त की पेशानी पे पड़ी लकीरों की कहानी
होगी कहानी ये वक्त के मुस्कुराते होंठो की कहानी 
वक्त के उठने, गिरने और संभलने की कहानी
हाँ कहेगी, ये माटी वक्त की कहानी कहेगी

होगी कहानी ये जीवन की रवानी की कहानी
जलते बुझते अरमानो के जुगनुओ की कहानी
सुनाएगी ये अपने सीने में जज़्ब हर
आंसू, खून और पसीने की कहानी 
हाँ कहेगी, ये माटी ज़िन्दगी की कहानी कहेगी 

सुनाएगी तुम्हे ये इस फानी दुनिया की कहानी
इंसान की कुदरत से लड़ाई की कहानी
विकास के दंभ में चूर इंसान के
परमेश्वर बनने की जद्धोजेहेद  की कहानी
हाँ कहेगी, ये माटी इंसानी चाहतों की कहानी कहेगी

सुनाएगी तुम्हे ये अपने दर्द की भी कहानी
कभी फर्श पे कुचले जाने की कहानी
कभी अर्श पे उछाले जाने की कहानी 
अपनी धरा माँ की इंसान के हाथो होते
क़त्ल की कहानी 
हां कहेगी, ये माटी अपने साक्षी होने की कहानी कहेगी 

कहेगी, हाँ कहेगी, ये माटी सभी की कहानी कहेगी
कहती आई है
कहती रहेगी
हाँ कहेगी, ये माटी सभी की कहानी कहेगी...! :)

Tuesday, March 13, 2012

आदमी

रंग-ओ-बू का सिलसिला होता है
आदमी भी एक गुलिस्तान होता है

खूँ की बू से लबरेज़ है कहीं,
मुहब्बत का कहीं पासबां होता है

उम्मीदों के लिए अपनी इक मकाम ढूंढता है
गली गली कूचो कूचों में इक भगवान् ढूंढता है

अजीब है चलन इंसान के ज़हन का
कभी अदीब तो कभी अजीब सा लगता है

सफ़र जिंदगानी का कैसा भी क्यूँ ना हो
इंसान उसमें हर समय इक मोड़ ढूंढता है ..! :) (Smriti)

Wednesday, September 28, 2011

जीवन है संघर्ष

जीवन है संघर्ष अनवरत 
मृत्यु अटल विश्राम है 

जीवन संघर्ष से इंकार मगर
कायरों  का ही काम है 
जो जीते जीवन समर को 
मृत्यु विश्राम उसका इनाम है 

माना ये संग्राम विकट है 
तेरा मनन भी हुआ विकल है 
मगर इस समर में विजय पाने को
हिम्मत तेरी दुधारी तलवार है 

रिश्ते नाते अहम्  बहुत हैं 
अहम् जीवन में प्यार भी है 
मगर पहला प्यार जीवन का
तेरा स्वयं होने का एहसास ही है

माना दुःख कष्टों के घन सघन हैं
राह में कंटक विस्तार है 
मगर जीवन में आगे बढ़ने का 
तुझे मिला वरदान है 

बावरे .... तू है तो ही जीवन को 
मिलता हर आयाम है 

Saturday, March 19, 2011


उदास शाम के किनारों पर 
यादों की रुनझुन करती 
पायलें खनक रही हैं
थिरकती हुई यादों को 
देख मन को उदासी 
के सायों ने घेर लिया है..

यादों की आँखों में हैरानी के साए हैं
हैरान आँखों से वो पूछती है
में तो यहाँ हूँ,खुश हूँ, थिरक रही हूँ
तुम्हारी आँखों में तलाश फिर ये किसकी है?
उदास सी राहों पर  ये सवालों की कतार क्यूँ लगी हैं

मन  बोला , री नादान…! 
ये तलाश है उन हकीकतों की 
जिनसे तू वजूद में आई
उन आषीशी हाथों की 
जो अपनी नर्म छाँव से सदा मुझे ढके रहे
वो हाथ जो मेरी ऊँगली थाम मुझे 
जीवन की राहों पर चलना सिखाते रहे
जिनकी आँखें अपने जीवन से अधिक मेरे जीवन को आतुर थी
सुरक्षा का वो घेरा आज न जाने कहाँ चला गया
तू तो वजूद में आ गयी मगर वो खो गया

तभी , बस ठीक तभी
आँखों में दो आंसू भर गए हैं
शायद परमात्मा के दूत हैं ....समझाने आये हैं
हकीकतों से यादों के वजूद होते हैं
यादों से हकीकतें नहीं बना करतीं....
मत ढूंढ उन हकीकतों को
जो रेत सी फिसल कर वक़्त की धारा में जा मिली हैं
हाथ थाम ले उन यादों का 
और एहसासों की पगडण्डी पर 
अपना जीवन सफ़र फिर शुरू कर 

और  मैं फिर यादों की थिरकन को देखने लगती हूँ
खामोश  सी ...कुछ स्तब्ध सी...!


Daman Dil Ka



सांस  बह  रही  है  टूट  कर  
कतरा  कतरा 
किस  धारा  से  मिल  रही  
जीवन  की  या  वक़्त  की 
मगर  वो  खुद  ही  बह  रहे  दोनों , टूट  कर 
कतरा  कतरा 

वक़्त  से  पल  गिर  रहे  
जीवन  से  ज़िन्दगी  छूट  रही 

किस  में  गिर  रहे  दोनों 
किस  में  मिल  रहे 

कौनसी  है  वो  झोली  जो,
समेट  रही  इन  कतरों  को  

चेतन  सत्ता  का  कोई  आंचल  
कहाँ  है  इतना  गहरा 

व्योम  का  कोई  आधार  नहीं  
जो  संभाल  ले  इन  कतरों  को 

मगर  शायद  इक  दुनिया  है  
एक  आधार  जिसे  है  स्वीकार 
साँसों  का  टूटना  
पलों  का  गिरना 
ज़िन्दगी  का  छूटना 

हाँ 
वो  कायेनात  है  दिल  की 
वो  दामन  है दिल का 
दिल -- जो नाम  है  सहज  स्वीकृति  का  
चेतन  अवचेतन  के  तानो  से  बुना 
हाँ  ये  दामन  दिल  का ....! 

Friday, December 24, 2010

khushiyon ke phool


तलाशो  तो  दो  जहाँ  खुद  में  हैं ...
नहीं  तो  कायेनात  भी  झूठी  है .. !! 

भ्रम  है  कि  खुशियाँ  सामने  किसी  मोड़  पे   खड़ी  हैं 
झांको  ज़रा  जो  अपने  दिल  में  ये  कलियाँ  तो  वही  खिली  हैं 

चाहते  हो  कोई  आये  और  दामन  मुस्कानों  से  भर  दे ....
ज़रा  गिरेबान  में  तो  देखो  ये  करम तुमने  कितनो  पे  किया  है .....?

आकांक्षाएं  अपेक्षाएं  बहुत  आसान  राहें  हैं  दिल  बहलाने  कि 
ज़रा  इनपे  उतर  के  तो  देखो  दिल  से  लहू  निचोड़  लेती  हैं 

सुनते  आये  हैं  बुजुर्गो  से  जो  दोगे  सो  पाओगे 
गर  गम  देखते  हो  दमन में  तो  समझ  लो  क्या  दिया  था  तुमने ...!

इक  बार  तो  सब  कुछ  भुला  के  सिर्फ  अपने  लिए  मुस्कुराओ ...
इक  बार  अपनी  मेहनत  से  किसी  के  होंटों  पे  तो  मुस्कान  लाओ ...

दिल  कि  कलियों  को  मुस्कानों  के  फूल  बन  जहाँ  को  महकाने  तो  दो 
जीवन  तुम्हारा  भी  खुशियों का चमन  होगा ...!

Thursday, November 4, 2010

मंगलकामना





सहस्त्रो दीपों के उज्जवल प्रकाश से आपका मस्तकाभिषेक हो !
समृधि की छत्रछाया में आप एवं आपके  परिवार  का भविष्य गौरान्वित हो !
ऐसी ही अनेकानेक शुभकामनाओं से परिपूर्ण मेरे बधाई कलश को स्वीकार कर मुझे गौरव प्रदान करें ! :)
दीपोत्सव मंगलमय हो !